औषधि का परिचय
तुलसी भारतीय घरों में पूजनीय और औषधीय पौधा मानी जाती है। आयुर्वेद में इसे कफ, सर्दी और श्वसन संबंधी समस्याओं में उपयोगी बताया गया है।
औषधि के नाम (हिंदी / अंग्रेजी)
हिंदी नाम: तुलसी, वृंदा। अंग्रेजी नाम: Holy Basil। वैज्ञानिक नाम: Ocimum tenuiflorum / Ocimum sanctum।
औषधि की पहचान
इसके पत्ते छोटे, सुगंधित और हरे या बैंगनी रंग के हो सकते हैं। तना हल्का रोयेदार और फूल छोटे गुच्छों में आते हैं।

- छोटे सुगंधित पत्ते
- हल्का रोयेदार तना
- छोटे गुच्छों में फूल
औषधि कहाँ-कहाँ मिलती है
यह भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में घरों, आंगन, मंदिरों और नर्सरी में आसानी से मिल जाती है।
औषधि उगाने की विधि
तुलसी को गमले या खेत में बीज/कटिंग से उगाया जा सकता है। धूप, हल्की नमी और पानी निकास वाली मिट्टी इसके लिए अच्छी रहती है।
औषधि के लाभ
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन, खांसी-जुकाम और मानसिक ताजगी में सहायक मानी जाती है।
किन-किन रोगों में उपयोगी है
सर्दी, खांसी, गले की खराश, हल्का बुखार, कफ और पाचन की हल्की परेशानी में घरेलू रूप से उपयोग की जाती है।
उपयोग की विधि
आम तौर पर 4-5 पत्ते चबाकर, काढ़े में या चाय में डालकर लिया जाता है। मात्रा व्यक्ति की स्थिति के अनुसार वैद्य से पूछकर तय करें।
कब नहीं लेना चाहिए (सावधानियां)
गर्भावस्था, रक्त पतला करने वाली दवा, गंभीर बीमारी या एलर्जी की स्थिति में वैद्य की सलाह के बिना नियमित सेवन न करें।
औषधि का संरक्षण कैसे करें
ताजा पत्ते धोकर छाया में सुखाएं और एयरटाइट डिब्बे में रखें। नमी से बचाकर रखने पर सूखी तुलसी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।